भिलाई स्टील प्लांट ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया बड़ा कदम, चिमनी की गैस से बनेगा एथेनॉल, कोयले की खपत भी घटेगी
भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नया कदम उठाया है। अब प्लांट की चिमनियों से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस से एथेनॉल बनाया जाएगा। इससे न केवल वायुमंडलीय प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि हर साल लगभग 2.30 लाख टन कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सकेगा।
भिलाई। स्टील उत्पादन प्रक्रिया में भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) ने नवाचार की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब बीएसपी स्टील निर्माण के दौरान निकलने वाली चिमनी गैस से एथेनॉल उत्पादन करेगा।
सेल (SAIL) ने इस परियोजना के लिए श्रीराम कंपनी से अनुबंध किया है, और ट्रायल की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। यदि यह सफल रहता है, तो हर 25 टन CO₂ गैस से लगभग 2.5 टन एथेनॉल तैयार किया जा सकेगा। इससे वायुमंडलीय प्रदूषण में महत्वपूर्ण कमी आएगी और बीएसपी को एथेनॉल बिक्री से आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
बीएसपी का उद्देश्य सिर्फ एथेनॉल उत्पादन नहीं, बल्कि ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता भी कम करना है। स्टील निर्माण के दौरान उत्पन्न गैस को अब प्लांट के अंदर स्थित थर्मल पॉवर स्टेशन को भेजा जाएगा, जिससे कोयले की खपत घटेगी और CO₂ उत्सर्जन में और कमी आएगी।
साथ ही, बीएसपी में बिजली की भारी मांग को देखते हुए अब सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दी जा रही है। लगभग 70 मेगावॉट की क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार, 1 मेगावॉट का प्लांट हर साल 980 टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सक्षम होगा।
स्टील निर्माण के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए बीएसपी अब सतत विकास की राह पर अग्रसर है। यह न केवल पर्यावरण के हित में है, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्पादन लागत को भी प्रभावित करेगा, जिससे बीएसपी प्रतिस्पर्धी बाजार में और मजबूत स्थिति में उभर सकता है।