- बिलासपुर रेंज में 89 पुलिस अधिकारियों को एनडीपीएस एक्ट की विवेचना की तकनीकी बारीकियों से कराया गया अवगत
- विशेषज्ञों ने बताया—जांच में छोटी चूकें बनती हैं अपराधियों के बरी होने का कारण
देशभर में बढ़ते नशे के प्रचलन को देखते हुए, इसकी रोकथाम के लिए पुलिस को सशक्त एवं तकनीकी रूप से दक्ष बनाना अनिवार्य हो गया है। इसी उद्देश्य से दिनांक 16 मई 2025 को बिलासपुर रेंज के ‘चेतना भवन’ में एक दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत दर्ज प्रकरणों की विवेचना में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बिलासपुर। नशीले पदार्थों की रोकथाम के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज के रक्षित केंद्र स्थित चेतना भवन में दिनांक 16 मई 2025 को एक दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन पुलिस महानिरीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला द्वारा किया गया, जिसमें एनडीपीएस एक्ट की विवेचना से जुड़े कानूनी और तकनीकी पहलुओं को विस्तारपूर्वक समझाया गया।

इस प्रशिक्षण सत्र में बिलासपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले जिलों से 89 पुलिस अधिकारी, जिनमें उप पुलिस अधीक्षक से लेकर सहायक उप निरीक्षक तक के अधिकारी शामिल थे, ने भाग लिया। कार्यशाला में अभियोजन विभाग एवं उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं सहित अनुभवी पुलिस अधिकारियों ने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे जांच में की गई छोटी सी गलती भी केस को कमजोर कर सकती है।
विशेष लोक अभियोजक श्री सूर्यकांत शर्मा एवं संयुक्त संचालक अभियोजन श्री माखनलाल पाण्डेय ने बताया कि एनडीपीएस मामलों में दोषमुक्ति प्रायः दस्तावेजी खामियों जैसे सील-मोहर की अनुपस्थिति, पंचनामे में त्रुटि, महिला तलाशी में नियमों की अनदेखी आदि के कारण होती है। इसलिए विवेचना में प्रत्येक प्रक्रिया का विधिवत पालन किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

सीएसपी सिविल लाईन श्री निमितेश सिंह ने एनडीपीएस मामलों में फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन और एंड टू एंड विवेचना के महत्व पर बल देते हुए बताया कि आरोपियों द्वारा अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त कर न्यायालय में सफेमा के अंतर्गत राजसात किया जाना चाहिए।
वहीं, अधिवक्ताद्वय श्री विभाकर सिंह और श्री शैलेन्द्र दुबे ने विवेचना में होने वाली आम त्रुटियों के कानूनी प्रभावों को रेखांकित किया और अधिकारियों को सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण की सलाह दी।
कार्यशाला के समापन पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती मधुलिका सिंह एवं एएसपी श्री राजेन्द्र जायसवाल द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। यह कार्यशाला न केवल जानकारीवर्धक रही बल्कि जांच प्रक्रिया में सुधार लाने हेतु महत्वपूर्ण दिशानिर्देश प्रदान करने में भी सफल रही।