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छत्तीसगढ़ के लड़कों, बैंक खातों पर सौरभ ने लगाया बैन
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सीबीआई, ईडी की कार्रवाई के बाद कारोबार का बड़ा फेरबदल
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वानुआतू की नागरिकता लेकर करोड़ों का निवेश कर रहे सौरभ-रवि
महादेव ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट पर केंद्रीय एजेंसियों की सख्ती का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक महादेव बुक का मुख्यालय दुबई से हटाकर श्रीलंका शिफ्ट कर दिया गया है। इस बदलाव की बड़ी वजह यूएई सरकार का दबाव और दुबई की अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ रहा दाग है। सट्टा नेटवर्क से जुड़े आइडी, ट्रांजैक्शन, लॉन्ड्रिंग और सेटलमेंट अब श्रीलंका से संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि प्रमोटर सौरभ चंद्राकर अभी भी दुबई में मौजूद है।
रायपुर/दुबई/कोलंबो। 6,000 करोड़ रुपये के बहुचर्चित महादेव सट्टा घोटाले पर जांच एजेंसियों की कड़ी कार्रवाई का असर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ नजर आने लगा है। लगातार बढ़ते कानूनी दबाव और यूएई सरकार की सख्ती के चलते, इस सिंडिकेट के सरगना सौरभ चंद्राकर ने सट्टा नेटवर्क का मुख्यालय दुबई से श्रीलंका शिफ्ट कर दिया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, श्रीलंका में बनाए गए नए बेस से ही अब आईडी जनरेशन, ट्रांजैक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग और सेटलमेंट जैसे सभी कामकाज संचालित हो रहे हैं। दुबई में काम कर चुके कई युवाओं ने पुष्टि की है कि यह बदलाव दबाव की वजह से किया गया।
बताया जा रहा है कि सौरभ और उनके सहयोगी रवि उत्पल के पास वानुआतू की नागरिकता है और उन्होंने अब तक इस अवैध कारोबार में करीब 4,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। केंद्रीय एजेंसियों के शिकंजे में आने के बाद सौरभ ने छत्तीसगढ़ के युवाओं को भर्ती करने और वहां के बैंक खातों के जरिए लेन-देन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
एक महीने की जांच में सामने आया है कि दुबई और श्रीलंका स्थित ऑपरेशन सेंटरों में काम करके लौटे 20 से अधिक युवाओं ने इस शिफ्टिंग को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनके मुताबिक दुबई में अंतरराष्ट्रीय बदनामी और जांच एजेंसियों की सक्रियता के चलते यह कदम उठाया गया।
अब तक इस घोटाले में 70 से अधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो चुकी हैं, और कई बड़े अफसरों व नेताओं के परिसरों पर सीबीआई की छापेमारी हो चुकी है। महादेव बुक से जुड़े हजारों युवा अब भी विदेशी ठिकानों पर काम कर रहे हैं और इन्हें 30 हजार से 1 लाख रुपये तक की सैलरी दी जा रही है। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क का कुल मासिक कारोबार 500 करोड़ रुपये से अधिक है। एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क अब भी पूरी तरह सक्रिय है, लेकिन कानूनी घेरा लगातार मजबूत किया जा रहा है।