रमन सिंह बोले- 25 साल में नहीं देखा ऐसा दृश्य, विपक्ष ने तोड़ी संसदीय मर्यादा; कृषि मंत्री ने स्वीकारी DAP की कमी, कहा- सोसाइटी को ही देंगे खाद
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का चौथा दिन जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गया। डीएपी खाद की आपूर्ति को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने सदन में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और गर्भगृह में धरना देते हुए नारेबाजी की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने इसे संसदीय परंपरा के खिलाफ बताते हुए कार्रवाई स्थगित कर दी।
रायपुर। विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को भारी हंगामे के बीच चर्चा से ज्यादा टकराव का मंच बन गया। विपक्ष ने डीएपी खाद की आपूर्ति में निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व मंत्री उमेश पटेल के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने सदन के गर्भगृह में बैठकर सरकार विरोधी नारे लगाए।

कृषि मंत्री ने स्वीकारी खाद की कमी
कांग्रेस नेता उमेश पटेल के सवालों के जवाब में कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने माना कि जून तक लक्ष्य के मुकाबले 50% से भी कम डीएपी की आपूर्ति हो पाई है। उन्होंने इसे वैश्विक समस्या बताया और कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से जल्द ही स्थिति में सुधार होगा।
प्रधानमंत्री का नाम आते ही बिफरे विपक्षी विधायक
जैसे ही कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिया, कांग्रेस विधायकों ने हंगामा तेज कर दिया। उनका आरोप था कि मंत्री सवालों का जवाब देने की बजाय भाषणबाज़ी कर रहे हैं और किसानों को गुमराह किया जा रहा है।

रमन सिंह ने विपक्ष को लताड़ा
विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने विपक्षी विधायकों के गर्भगृह में बैठकर नारे लगाने को संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा, “25 वर्षों की विधानसभा परंपरा में ऐसा दृश्य नहीं देखा। यह छत्तीसगढ़ की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।” स्पीकर के दो बार आग्रह के बावजूद कांग्रेस विधायक बाहर नहीं गए, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
गृहमंत्री ने जताई नाराज़गी
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि निलंबित होने के बाद भी कार्यवाही में बाधा डालना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है। उन्होंने इसे ‘नए तरह की अशांति की शुरुआत’ बताया।
हाउसिंग बोर्ड पर भी उठा सवाल, सरकार लाई नई नीति
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने हाउसिंग बोर्ड की खाली पड़ी आवासीय योजनाओं पर चिंता जताते हुए नई व्यवस्था की घोषणा की। अब बिना 60% प्री-बुकिंग के कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं होगा। साथ ही उन्होंने बताया कि 30% प्री-बुकिंग होते ही तीन महीने के भीतर टेंडर जारी किए जा सकेंगे। अजय चंद्राकर व सुशांत शुक्ला के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रदेश में डिमांड के अनुरूप ही हाउसिंग की योजना बनेगी।