राज्यभर में 53 हजार से अधिक सीटों में 41 हजार पर ही हुए दाखिले; नियमों की खामियों से हर साल खाली रह जाती हैं हजारों सीटें
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क दाखिले की प्रक्रिया भले ही दो चरणों में चलाई जा रही हो, लेकिन अब भी हजारों सीटें भर नहीं पाईं। राज्यभर में लगभग 5 हजार सीटें रिक्त हैं और प्रवेश की अंतिम तारीख करीब आ चुकी है। ऐसे में यह आशंका फिर प्रबल हो गई है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी RTE की बड़ी संख्या में सीटें खाली ही रह जाएंगी।
रायपुर। राज्य में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में बच्चों के नि:शुल्क दाखिले की प्रक्रिया जारी है। इस समय दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें चयनित छात्र-छात्राओं को 10 अगस्त तक प्रवेश लेना है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में सीटें अब भी रिक्त हैं।
राज्य भर में RTE के तहत कुल 53,415 सीटें निर्धारित की गई थीं, जिनमें से अब तक केवल 41,441 सीटों पर ही दाखिले हो पाए हैं। इसके अलावा, 6,974 चयनित विद्यार्थी अभी प्रवेश की प्रतीक्षा में हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तकरीबन 5,000 सीटें रिक्त रह जाएंगी, और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होने तक यह संख्या और बढ़ सकती है।
रायपुर जिले की बात करें तो यहाँ कुल 5,203 सीटें थीं, जिनमें से 4,134 सीटों पर ही दाखिले हुए हैं। दूसरे चरण में 705 छात्रों का चयन किया गया है। फिर भी लगभग 365 सीटें खाली हैं। पहले चरण में यहाँ 4,510 आवेदन चयनित हुए थे, लेकिन तब भी 425 सीटें खाली रह गई थीं।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि प्रवेश नियमों में कुछ व्यवहारिक खामियाँ हैं, जिसकी वजह से हर साल RTE के अंतर्गत कई सीटें भर नहीं पातीं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, दस्तावेजों की जटिलता और निजी स्कूलों की अनिच्छा जैसी कई वजहें इसके पीछे मानी जा रही हैं। अब देखना यह है कि 10 अगस्त तक कितने और विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं और कितनी सीटें एक बार फिर खाली रह जाती हैं।