SBI की शिकायत पर दर्ज हुआ केस, NCLT में दिवालियापन कार्यवाही भी लंबित
उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा के बैंक लोन फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ FIR दर्ज की है। साथ ही, अनिल अंबानी से जुड़े ठिकानों और कंपनी के दफ्तरों पर छापेमारी भी की गई। यह कार्रवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शिकायत पर हुई है।
नई दिल्ली (ए)। कारोबारी जगत में हलचल मचाने वाले एक बड़े मामले में CBI ने उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ 2000 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक फ्रॉड का केस दर्ज किया है। एजेंसी ने FIR दर्ज करने के बाद अंबानी से जुड़े कई ठिकानों और कंपनी के दफ्तरों पर एक साथ छापेमारी की।
यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से लिए गए लोन से जुड़ा है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि SBI ने CBI में शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा बैंक ने अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन (पर्सनल इन्सॉल्वेंसी) की कार्यवाही भी शुरू की है, जो फिलहाल मुंबई NCLT में विचाराधीन है।
इससे पहले 23 जुलाई को भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यस बैंक से लिए गए 3000 करोड़ रुपए के लोन धोखाधड़ी मामले में रिलायंस ग्रुप से जुड़े 35 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे थे।
पूरे मामले के 4 बड़े पहलू
- CBI क्यों सक्रिय हुई?: 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने रिलायंस ग्रुप को करीब 2000 करोड़ रुपए के लोन दिए थे। जांच में सामने आया कि इन पैसों को कथित तौर पर फर्जी कंपनियों और अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया गया।
- CBI की भूमिका: एजेंसी ने यस बैंक द्वारा रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस को दिए गए लोन से जुड़े मामलों में भी FIR दर्ज की थी। यस बैंक के पूर्व CEO राणा कपूर का नाम भी इसमें आया।
- जांच के निष्कर्ष: ED की रिपोर्ट में कहा गया कि यह एक “सुनियोजित धोखाधड़ी” थी। इसमें कमजोर कंपनियों को लोन देना, एक ही डायरेक्टर और एड्रेस का इस्तेमाल करना, दस्तावेजों की कमी और पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए लोन लेना जैसी गड़बड़ियां सामने आईं।
अनिल अंबानी और RCom पर आरोप: SBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को “फ्रॉड” घोषित करते हुए कहा कि कंपनी ने बैंक से लिए 31,580 करोड़ रुपए में से करीब 13,667 करोड़ दूसरों के कर्ज चुकाने में और 12,692 करोड़ रुपए रिलायंस की अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए।