जिले के थानों में 40 हजार से ज्यादा वाहन खड़े; दावा नहीं करने वाले मालिकों की गाड़ियां होंगी कबाड़ में तब्दील, सरकार को मिलेगा राजस्व
दुर्ग जिले के थानों में बरसों से खड़े जब्त वाहन अब नीलामी की प्रक्रिया से हटाए जाएंगे। पुलिस ने करीब 1700 गाड़ियों की पहचान कर ली है, जिन्हें 28 पुलिस एक्ट के तहत कोर्ट की अनुमति से नीलाम किया जाएगा। एक महीने में दावा नहीं आने पर इन गाड़ियों को कबाड़ मानकर कार्रवाई होगी।
दुर्ग। जिले के थानों में चोरी, दुर्घटना और तस्करी जैसे मामलों में जब्त किए गए वाहनों का अंबार लगा हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, थानों में करीब 40 हजार दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े हैं। लंबे समय से बंद पड़े ये वाहन अब जंग खाकर कबाड़ में बदल रहे हैं और थानों की जगह भी घेर रहे हैं।
एसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने अब तक लगभग 1700 वाहनों की पहचान कर ली है। इनमें कई लावारिस भी हैं और कुछ मुकदमों में जब्त हैं। इनकी नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस ने 28 पुलिस एक्ट के तहत एसडीएम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है।
क्यों नहीं छुड़ाते मालिक?
वाहन मालिक अक्सर कागजी कार्रवाई की जटिलता के कारण गाड़ियां छुड़ाने नहीं आते। कई वाहन मुकदमों में उलझे हैं, जिनकी नीलामी न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव है। थानों में खड़े वाहनों से न केवल जगह की कमी हो रही है, बल्कि साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
एक महीने में दावा नहीं, तो नीलामी
पुलिस ने नीलामी के लिए इश्तहार जारी कर दिया है। एक महीने के भीतर यदि कोई वाहन मालिक दावा नहीं करता तो गाड़ियों की नीलामी कर दी जाएगी। इस प्रक्रिया से थानों में जगह खाली होगी और पुलिसिंग में सुधार आएगा। साथ ही सरकार को भी राजस्व मिलेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया पूरी होने में तीन से चार महीने का समय लगेगा। इसी के साथ नारकोटिक्स और गौ-तस्करी में जब्त वाहनों के निराकरण की कार्रवाई भी चल रही है।
क्यों जरूरी है नीलामी?
थानों में खड़े वाहनों के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। सालों से खड़ी गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। यदि यह नीलामी प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से जारी रही तो पुलिस को जगह और संसाधन दोनों मिलेंगे और वाहन भी व्यर्थ नहीं जाएंगे।