ट्रांसयूनियन सिबिल रिपोर्ट में खुलासा – सुरक्षित लोन पर भरोसा, पर्सनल और ऑटो लोन की रफ्तार धीमी, 25 साल से कम उम्र के युवा सबसे ज्यादा सतर्क
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जून 2025) में जारी ट्रांसयूनियन सिबिल की क्रेडिट ट्रेंड्स रिपोर्ट ने दिलचस्प तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट बताती है कि लोग अब सिक्योर्ड यानी कोलैटरल वाले लोन जैसे प्रॉपर्टी और गोल्ड लोन को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि अनसिक्योर्ड लोन – पर्सनल और ऑटो लोन की मांग धीमी पड़ गई है। महंगाई और नौकरी की अनिश्चितता ने खासकर युवाओं को लोन लेने से पीछे कर दिया है।
नई दिल्ली (ए)। भारत में रिटेल क्रेडिट मार्केट का मूड बदल रहा है। ट्रांसयूनियन सिबिल की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2025 तिमाही में गोल्ड लोन की मांग 34% और प्रॉपर्टी लोन 16% बढ़े हैं। वहीं होम लोन में 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके उलट पर्सनल लोन महज़ 9%, ऑटो लोन 4% और टू-व्हीलर लोन 3% की रफ्तार ही पकड़ पाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोग अब ऐसे लोन चुन रहे हैं, जिनमें गिरवी रखकर पैसा मिलता है। इससे उधारदाता का रिस्क भी घटता है और उधारकर्ता को बेहतर शर्तें मिलती हैं। वहीं अनसिक्योर्ड लोन की मांग घटने का मतलब है कि उपभोक्ता खर्च को लेकर सतर्क हैं।
क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर (सीएमआई) 98 से गिरकर 92 पर आ गया है। इसका सीधा मतलब है कि रिटेल क्रेडिट ग्रोथ धीमी हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि 25 साल से कम उम्र के उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी 19% से घटकर 18% रह गई है। 26 से 35 साल के युवाओं का हिस्सा भी 40% से घटकर 38% तक आ गया है। यानी नई पीढ़ी अब कर्ज लेने से बच रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 महीनों में 25% प्राइम बॉरोवर्स का क्रेडिट स्कोर डाउनग्रेड हुआ है। यह आंकड़ा पिछले साल 23% था। इससे संकेत मिलता है कि रीपेमेंट स्ट्रेस हल्के-फुल्के स्तर पर मौजूद है। इसके अलावा, क्रेडिट कार्ड ओरिजिनेशन में 20% की गिरावट और टू-व्हीलर लोन में 1% की कमी आई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि महंगाई और नौकरी को लेकर असुरक्षा ने उपभोक्ताओं को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि बड़े खर्च और अनसिक्योर्ड लोन से दूरी बढ़ रही है। हालांकि, गोल्ड और प्रॉपर्टी लोन जैसी कैटेगरी में ग्रोथ को अर्थव्यवस्था के लिए स्थिरता का संकेत माना जा रहा है।