मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दावा: मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का सपना होगा साकार
रायपुर। बस्तर अंचल में अब परिवर्तन की हवा बह रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति 2025 ने माओवादी हिंसा से भटके लोगों में विकास और शांति की नई उम्मीद जगाई है। अब बस्तर का अंधियारा धीरे-धीरे छंट रहा है और लोगों का विश्वास मुख्यधारा की राह पर लौट रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर संभाग में चलाए जा रहे ‘पूना मारगेम अभियान’ और दंतेवाड़ा जिले के ‘लोन वर्राटू अभियान’ का सकारात्मक असर दिख रहा है। इन पहलों से प्रभावित होकर हाल ही में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जनता के भरोसे का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन की शुरुआत के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत शिक्षा, रोजगार और अन्य सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 1770 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त किया जाएगा और आत्मसमर्पित साथियों को सम्मानजनक जीवन एवं पुनर्वास मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जोर देते हुए कहा कि बस्तर बदल रहा है और नक्सलवाद का अंधियारा धीरे-धीरे छंट रहा है। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त संकेत है।
बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में आत्मसमर्पण नीति, विकास योजनाएँ और जनविश्वास ने सकारात्मक बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के अनुसार मार्च 2026 तक पूरे अंचल में नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है। यह बदलाव बस्तर में स्थिरता, विकास और सुरक्षा की नई राह खोल रहा है।