- उम्र बढ़ने के साथ काफ, शिन और हिप मसल्स कमजोर पड़ती हैं
- रोजाना अलग-अलग वॉकिंग स्टाइल्स शरीर को देंगे मल्टीविटामिन जैसा फायदा
- फ्लेक्सिबिलिटी, पॉश्चर और बैलेंस सुधारने का आसान तरीका
अगर आपके पास जिम जाने या लंबी एक्सरसाइज का वक्त नहीं है, तो रोजाना सिर्फ 10 मिनट की अलग-अलग वॉकिंग स्टाइल आपकी सेहत का बैलेंस संभाल सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि टो वॉक, हील वॉक, हिप रोटेशन वॉक, साइड-टू-साइड वॉक और रिवर्स वॉक जैसी 5 तकनीकें जोड़ और मसल्स को मजबूत बनाती हैं और बॉडी को फ्लेक्सिबल रखती हैं।
नई दिल्ली (ए)। हम दिनभर एक ही तरीके से चलते हैं—सीधे और तेज़। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे मसल्स और जोड़ को कमजोर करती है, खासकर 40 की उम्र के बाद। काफ, शिन और हिप मसल्स को पर्याप्त ट्रेनिंग न मिलने से जॉइंट्स सख्त होने लगते हैं।
हेल्थ कोच रेणु रखेजा कहती हैं कि रोजाना सिर्फ 10 मिनट की 5 अलग-अलग तरह की वॉक आपके शरीर के लिए मल्टीविटामिन की तरह काम करती हैं। ये न सिर्फ बैलेंस और पॉश्चर सुधारती हैं बल्कि लोअर बैक और हिप्स की जकड़न भी कम करती हैं।
कैसे करें ये 5 वॉकिंग स्टाइल?
- टो वॉक (1 मिनट): पंजों पर चलें, इससे काफ और रीढ़ की मसल्स मजबूत होती हैं।
- हील वॉक (1 मिनट): सिर्फ एड़ियों पर कदम रखें, शिन मसल्स एक्टिव होंगी और ठोकर लगने की आशंका घटेगी।
- हिप रोटेशन वॉक (1 मिनट): जांघ उठाकर बाहर की ओर सर्कल बनाएं, हिप्स की जकड़न दूर होगी।
- साइड-टू-साइड वॉक (1 मिनट): हल्के स्क्वैट पोजीशन में दाएं-बाएं चलें, जांघ और हिप स्टेबलाइजर मजबूत होंगे।
- रिवर्स वॉक (2-5 मिनट): पीछे की ओर चलें, बैलेंस और कोऑर्डिनेशन बेहतर होगा और घुटनों पर दबाव कम पड़ेगा।
कब करें और किन बातों का रखें ध्यान?
सुबह-शाम छोटे स्लॉट्स में भी इसे किया जा सकता है। ये सामान्य वॉक या जिम सेशन का बेहतरीन सपोर्ट हैं। नॉन-स्लिप फ्लोर और आरामदायक जूते का इस्तेमाल करें। अगर घुटनों या एड़ी में पुराना दर्द है या हाल ही में सर्जरी हुई है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। रेणु रखेजा का कहना है कि हल्की मसल वार्मथ सामान्य है, लेकिन तेज दर्द महसूस हो तो तुरंत रोक देना चाहिए।