स्वयंसेवकों के तीन किलोमीटर लंबे पथ संचलन से गूंजा भारत माता का जयघोष, दिलेश्वर उमरे बोले— संघ स्वयंसेवक तपस्या और त्याग का प्रतीक
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर जेवरा मंडल देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया। शताब्दी उत्सव के अवसर पर स्वयंसेवकों का अनुशासित पथ संचलन जनमानस के लिए प्रेरणा का दृश्य बन गया। हर चौक और गली ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठी, तो घरों की छतों से पुष्पवर्षा होती रही।
भिलाई (पंचायतीलाला)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष पर जेवरा मंडल में देशभक्ति का अभूतपूर्व माहौल देखने मिला। जेवरा, सिरसा, भटगांव, कुटेलाभाठा, खपरी, चिखली, समोदा और कचांदुर सहित नौ गांवों के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में सुसज्जित होकर साजर राउत देवालय प्रांगण से अनुशासित पथ संचलन प्रारंभ किया। करीब तीन किलोमीटर लंबे इस संचलन में स्वयंसेवकों की कदमताल और घोष वादन ने वातावरण को राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कर दिया।
मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कहीं रंगोलियों से स्वागत हुआ, तो कहीं तोरणद्वारों और पुष्पवर्षा ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। देशभक्ति गीतों की गूंज के बीच स्वयंसेवकों की पंक्तियाँ अनुशासन, एकता और संगठन की सजीव झलक प्रस्तुत कर रही थीं।

मुख्य वक्ता आरएसएस दुर्ग विभाग सहकार्यवाह दिलेश्वर उमरे ने कहा— “संघ स्वयंसेवक का जीवन तपस्या और त्याग का प्रतीक है। यह शताब्दी यात्रा छह सरसंघचालकों की साधना का परिणाम है— डॉक्टर हेडगेवार की नींव, गुरुजी का विस्तार, देवरस की सेवा, रज्जू भैया का विदेश विस्तार, सुदर्शन का स्वदेशी आग्रह और मोहन भागवत का समरसता संदेश इस यात्रा की आत्मा हैं।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, शिक्षाविद एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य एस.पी. सार्वे ने कहा कि आरएसएस ने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रप्रेम की ज्योति को प्रज्ज्वलित रखा। उन्होंने संघ को एकता और समरसता का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता दुर्ग विकासखंड संघ संचालक सुनील कुंभकार ने की। इस अवसर पर प्रचार प्रमुख निकश साहू, शारीरिक प्रमुख दुलेश्वर वर्मा, किसान संघ जिलाध्यक्ष लोकेंद्र बंछोर सहित सैकड़ों स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गौरवपूर्ण बना दिया।