राज्य के आश्रम-छात्रावासों और तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों को अब तय समय पर मिल रही शिष्यवृत्ति, ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से शिक्षा की राह हुई आसान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में अब विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति राशि समय पर ऑनलाइन मिल रही है। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के करीब दो लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में 84.66 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर कर सरकार ने शिक्षा को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ी पहल की है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल से छत्तीसगढ़ में अब विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति राशि समय पर मिल रही है। राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, आश्रम-छात्रावासों और तकनीकी एवं प्रोफेशनल कोर्स में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था शिक्षा की राह को काफी आसान बना रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने हाल ही में मंत्रालय, महानदी भवन से इन वर्गों के लगभग दो लाख विद्यार्थियों के खातों में 84.66 करोड़ रुपये की राशि ऑनलाइन अंतरित की।
यह उल्लेखनीय है कि शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति के ऑनलाइन भुगतान की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री साय ने पहली बार 10 जून 2025 को की थी। इस दिन प्री-मैट्रिक आश्रमों और छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को 77 करोड़ रुपये की शिष्यवृत्ति और पोस्ट-मैट्रिक छात्रों के लिए भोजन सहायता की 8.93 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई थी। इसके बाद 17 जून 2025 को दूसरे चरण में 8370 विद्यार्थियों को 6.2 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति ऑनलाइन दी गई।
हाल ही में हुए तीसरे चरण में मुख्यमंत्री के हाथों 1 लाख 86 हजार 50 विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति की दूसरी किश्त के रूप में 79.27 करोड़ रुपये और 12 हजार 142 विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की 5.38 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई है।
मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री रामविचार नेताम और प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के निर्देशन में विभाग ने विद्यार्थियों को बिना रुकावट शिक्षा प्राप्त करने हेतु नई व्यवस्था तैयार की है।
प्रमुख सचिव श्री बोरा के प्रयासों से अब विद्यार्थियों को जून, सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर में समयबद्ध रूप से छात्रवृत्ति राशि उनके बैंक खातों में ऑनलाइन प्राप्त हो रही है। पहले यह भुगतान वर्ष में केवल एक बार, दिसंबर या फरवरी-मार्च में किया जाता था। इस बदलाव से विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिली है।
आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी लंबे समय से देरी से मिलने वाली छात्रवृत्ति से जूझते रहे हैं। समय पर सहायता राशि मिलने से वे अपनी अध्ययन सामग्री, किताबें और स्टेशनरी खुद खरीद पा रहे हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने में सुविधा मिली है।
यह व्यवस्था केवल आर्थिक सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से अब विद्यार्थी उच्च शिक्षा और व्यावसायिक कोर्सों की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। इससे राज्य में एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक युवा पीढ़ी का निर्माण होगा।
अंततः कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल ने समावेशी शिक्षा को नई दिशा दी है। समय पर स्कॉलरशिप वितरण की यह व्यवस्था न केवल विद्यार्थियों की आर्थिक मदद करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।