परसोढ़ीकला में जमीन अधिग्रहण का जोरदार विरोध; पथराव, आंसू गैस, भारी बल की तैनाती; सिंहदेव ने कहा—‘यही है गुजरात मॉडल’
सरगुजा जिले में SECL की अमेरा ओपनकास्ट खदान के विस्तार को लेकर ग्रामीणों का विरोध बुधवार को हिंसक हो गया। जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच जमकर पथराव हुआ, जिसमें ASP, थाना प्रभारी समेत 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों को भी चोटें आईं। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
सरगुजा। SECL की अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस के विस्तार ने सरगुजा में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। परसोढ़ीकला गांव के ग्रामीण जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं, जिसे लेकर बुधवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस पर पत्थर और गुलेल से हमला किया, वहीं पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में पथराव किया।

झड़प में ASP अमोलक सिंह, SDOP ग्रामीण और धौरपुर थाना प्रभारी अश्वनी सिंह सहित 25 पुलिसकर्मी घायल हुए। दूसरी ओर 12 से अधिक ग्रामीण भी चोटिल हुए हैं। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और भीड़ को खदेड़कर कई लोगों को हिरासत में ले लिया। देर रात SECL ने कड़ी सुरक्षा के बीच सीमांकन की कार्रवाई पूरी की। क्षेत्र में अब भारी पुलिस बल तैनात है।
ग्रामीणों का आरोप—पुश्तैनी जमीन छीनी जा रही
ग्रामीणों के मुताबिक वर्ष 2001 में अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब नई जमीन लेने का दबाव बनाया जा रहा है। लोग पुश्तैनी जमीन को किसी भी कीमत पर खदान को नहीं देना चाहते। बुधवार को बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंचे अफसरों के विरोध में ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया।
गांव में सन्नाटा, पुरुष घरों से बाहर
पुलिस कार्रवाई के बाद गांव में दहशत का माहौल है। पुरुष गांव छोड़कर बाहर चले गए हैं। ग्रामीणों द्वारा लगाई गई टेंट-तंबू वाली चौकियों को पुलिस ने हटाकर कब्जे में ले लिया है। पुलिस गांव में लगातार तलाशी अभियान चला रही है और अतिरिक्त फोर्स भी तैनात कर दी गई है।
सिंहदेव का हमला—“यही है गुजरात मॉडल”
घटना पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरते हुए कहा कि ‘यही है वह गुजरात मॉडल’, जहां स्थानीय लोगों के रोजगार और संसाधनों पर बाहरी कंपनियों का कब्जा कराया जा रहा है। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि आदिवासियों और ग्रामीणों की बात सुने बिना खदान का विस्तार अतार्किक है।