RTI में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया—1 मई 2023 के बाद लागू होना चाहिए सिर्फ 50% रोस्टर; गलत आरक्षण से 260 से ज़्यादा पदों पर भर्ती प्रभावित
छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही 50% से अधिक आरक्षण सीमा के उल्लंघन पर अंतिम फैसला सुना सकता है, और यदि कोर्ट ने 58% आरक्षण व्यवस्था को खारिज किया, तो राज्य में 2023 के बाद निकली सैकड़ों भर्तियां रद्द होने की स्थिति में आ सकती हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों पर बड़ा असर डालने वाला फैसला जल्द ही सुप्रीम कोर्ट से आ सकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जुड़े आरक्षण मामलों की सुनवाई के दौरान यह संकेत मिले हैं कि 50% सीमा से अधिक आरक्षण को लेकर कोर्ट जल्द राय दे सकता है। यदि अदालत 58% आरक्षण व्यवस्था को असंवैधानिक ठहराती है, तो प्रदेश में 260 से अधिक पदों पर निकली भर्तियां सीधे प्रभावित होंगी।
दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने 2012 में 50% की सीमा पार करते हुए 58% आरक्षण लागू किया था। वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को निरस्त कर दिया था। इसके बाद 1 मई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सीमित राहत देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से पहले विज्ञापित पुरानी भर्तियों को परिणाम के अधीन पूरा किया जा सकता है, लेकिन नई भर्तियों पर यह राहत लागू नहीं होगी।
इसके बावजूद राज्य सरकार की कई एजेंसियों ने इस आदेश की गलत व्याख्या करते हुए 1 मई 2023 के बाद की नई भर्तियों में भी 58% आरक्षण लागू कर दिया। जबकि कोर्ट ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था। इस भ्रम को RTI के जवाब ने स्पष्ट कर दिया है।
RTI में हाईकोर्ट का स्पष्ट जवाब
RTI में हाईकोर्ट ने बताया कि—
- 1 मई 2023 से पहले 58% रोस्टर लागू था: SC-12%, ST-32%, OBC-14%
- 1 मई 2023 से प्रभावी नया 50% रोस्टर ही लागू होना चाहिए: SC-16%, ST-20%, OBC-14%
इसके अलावा हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संविदा सीधी भर्ती के विज्ञापनों में केवल 50% रोस्टर ही लागू किया गया, यानी 2023 के बाद 58% आरक्षण का प्रयोग गलत था।
किन भर्तियों पर संकट?
1 मई 2023 के बाद कई विभागों ने 58% आरक्षण लागू करते हुए भर्ती विज्ञापन निकाले। इनमें प्रमुख रूप से—
- स्वास्थ्य विभाग में वार्ड बॉय के 12 पद
- आबकारी विभाग में आरक्षक के 200 पद
- जल संसाधन विभाग में अमीन के 50 पद
- और अन्य कई चयन बोर्डों द्वारा जारी परिणाम
इन सभी में 58% रोस्टर लागू किया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला विपरीत आने पर इन भर्तियों पर संशय गहरा जाएगा और चयन रद्द होने का खतरा बढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला न सिर्फ विभागों पर, बल्कि हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर भी सीधा असर डालेगा। प्रदेश भर में अभ्यर्थी इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।