हनुमंत कथा के चौथे दिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि हुए शामिल, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
दिव्य हनुमंत कथा के चौथे दिन कथा स्थल भक्ति, आस्था और राष्ट्रभाव से सराबोर नजर आया। कथा वाचन के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने सनातन धर्म की रक्षा और हिंदू समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए जात-पात से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद को अपनाने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि तभी भारत एक सशक्त हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकेगा।
भिलाई। हनुमंत कथा के चौथे दिन पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान चालीसा की चौपाइयों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए भगवान हनुमान को भगवान शंकर का रुद्रावतार बताया। उन्होंने कहा कि “शंकर सुवन केसरी नंदन” केवल शब्द नहीं, बल्कि हनुमान जी के दिव्य स्वरूप का परिचायक है। अंजनी माता और वानरराज केसरी के युगों तप के फलस्वरूप भगवान शिव ने वानर कुल में अवतार लिया।

कथा के दौरान उन्होंने हनुमान जी के अतुलित बल, अद्भुत पराक्रम और अद्वितीय विनम्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि सूर्य को निगलने, सौ योजन समुद्र लांघने और अकेले लंका दहन जैसे अद्भुत कार्य करने के बावजूद हनुमान जी का स्वयं को प्रभु श्रीराम का दास मानना, भक्त और भगवान के अटूट संबंध का सर्वोच्च उदाहरण है।

रविवार को चौथे दिन कथा स्थल से लेकर जयंती स्टेडियम मैदान और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों की संख्या में भक्त जमीन पर बैठकर तो कई श्रद्धालु पेड़ों पर चढ़कर कथा श्रवण करते नजर आए। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने हनुमंत कथा का रसपान किया।
कथा में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, सांसद संतोष पाण्डेय, भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय, हनुमंत कथा संयोजक राकेश पाण्डेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और समाजसेवी उपस्थित रहे। इसके अलावा वरिष्ठ नेता नंदकुमार साय, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णेंद्रु सक्सेना, बिसराम यादव, सांसद चंदूलाल साहू, आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास, युवा आयोग अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा सहित कई नेता कथा में शामिल हुए।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री केवल एक कथा वाचक नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग धर्म, संतों और शास्त्रों पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं, लेकिन जनता ऐसे लोगों को समय आने पर स्वयं उत्तर देगी। प्रदेश सरकार धर्म और समाज को दिशा देने वाले संतों और धर्माचार्यों के साथ सदैव खड़ी रहेगी।
हनुमंत कथा का समापन सोमवार को दोपहर 12 बजे से होगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।