आयुर्वेद और विज्ञान का अद्भुत मेल: जानें कैसे नाभि के जरिए नसों को पोषण देकर आप खुद को रख सकते हैं सेहतमंद
भिलाई : कड़ाके की ठंड में जब बर्फीली हवाएं हमारे शरीर की नमी छीन लेती हैं, तो अक्सर हम केवल त्वचा पर क्रीम या लोशन लगाकर मान लेते हैं कि हमने बचाव कर लिया। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के अंगों को स्वस्थ रखने की असली चाबी हमारी नाभि (Belly Button) में छिपी होती है। प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक शोध के अनुसार, नाभि शरीर का वह केंद्र है जहाँ से 72,000 सूक्ष्म नाड़ियाँ जुड़ी होती हैं। सर्दियों में न केवल हमारी त्वचा, बल्कि शरीर की नसें भी अंदर से सूखने लगती हैं जिसे ‘अंदरूनी खुश्की’ कहा जाता है। पंचायतलाला न्यूज़ की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे रात को सोते समय मात्र दो बूंद तेल आपकी नसों के इस रूखेपन को खत्म कर पूरे शरीर को नई ऊर्जा दे सकता है।
नसों की जकड़न और सुन्नपन दूर करने का प्राकृतिक मार्ग
सर्दियों में नसों का सख्त होना और उनमें लचीलापन कम होना एक बड़ी समस्या है, जिससे हाथ-पैरों में झुनझुनी और मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होने लगता है। मेडिकल भाषा में इसे नसों की ‘इलास्टिसिटी’ कम होना कहते हैं। नाभि के पीछे एक विशेष ग्रंथि होती है जिसे ‘पेकौटी ग्रंथि’ कहा जाता है, जो शरीर की हजारों नसों से सीधे जुड़ी होती है। जब आप नाभि में हल्का गुनगुना तेल डालते हैं, तो यह ग्रंथि उसे सोखकर उन नसों तक नमी पहुँचाती है जो ठंड के कारण सूखकर कमजोर हो रही होती हैं। यह प्रक्रिया रक्त वाहिकाओं को प्राकृतिक रूप से चिकनाहट प्रदान करती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर के अंगों का सुन्न होना बंद हो जाता है।
आंखों की थकान और चेहरे के निखार का गहरा विज्ञान
क्या आप जानते हैं कि आंखों का सूखापन, धुंधलापन और बार-बार फटने वाले होंठ इस बात का संकेत हैं कि आपके शरीर का आंतरिक लुब्रिकेशन यानी ‘ग्रीस’ खत्म हो रहा है? नाभि में शुद्ध घी या बादाम का तेल लगाने से उन नसों को पोषण मिलता है जो सीधे चेहरे और आंखों के रेटिना से जुड़ी होती हैं। यह तरीका उन लोगों के लिए वरदान है जो दिनभर मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं या जिन्हें सर्दियों में त्वचा के रूखेपन के कारण खुजली की समस्या रहती है। यह केवल एक बाहरी उपचार नहीं, बल्कि नसों को गहराई से हाइड्रेट करने का एक वैज्ञानिक तरीका है, जिससे पूरे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है।
पाचन तंत्र की मजबूती और जोड़ों के दर्द में सहायक
सर्दियों में हमारी पाचन शक्ति अक्सर सुस्त पड़ जाती है, जिससे पेट में भारीपन और कब्ज की समस्या बढ़ने लगती है। नाभि में अदरक या सरसों का तेल लगाने से पेट की मांसपेशियों को गर्माहट मिलती है, जो भोजन को पचाने में मदद करती है। इसके साथ ही, जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों के लिए भी यह तकनीक अचूक है। नाभि के जरिए पहुँचा तेल हड्डियों के जोड़ों के बीच की नमी को बनाए रखता है, जिससे घुटनों से आने वाली चटकने की आवाज और चलने-फिरने में होने वाली तकलीफ कम होती है। आयुर्वेद कहता है कि यह विधि शरीर के ‘वायु दोष’ को शांत करती है, जो सर्दियों में बढ़ने वाले हर तरह के दर्द का असली कारण होता है।
सही तेल का चुनाव और इस्तेमाल का सही तरीका
इस प्राकृतिक चिकित्सा का पूरा लाभ उठाने के लिए सही तेल चुनना बहुत जरूरी है। नसों के दर्द और जोड़ों की समस्या के लिए ‘सरसों या तिल का तेल’ सबसे अच्छा है, जबकि दिमाग को शांत रखने और बेहतर नींद के लिए ‘बादाम का तेल’ या ‘शुद्ध देसी घी’ का उपयोग करें। रात को सोने से पहले नाभि में तेल की 2-3 बूंदें डालें और नाभि के चारों ओर हल्का सा मसाज करें। ध्यान रहे कि नाभि का क्षेत्र साफ हो और इस क्रिया को नियमित रूप से कम से कम 21 दिनों तक करें। यह एक छोटा सा बदलाव आपको सर्दियों की कई परेशानियों से सुरक्षित रखने में मदद करेगा।