बस्तर में सुरक्षाबलों की अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी, ‘पुना मारगेम’ नीति से प्रभावित होकर 18 महिलाओं सहित 63 नक्सलियों ने छोड़ी हिंसा
दंतेवाड़ा (ए) : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सुरक्षाबलों को माओवादी मोर्चे पर ऐतिहासिक सफलता मिली है। शासन की पुनर्वास नीति ‘पुना मारगेम’ से प्रभावित होकर एक साथ 63 माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सीआरपीएफ (CRPF) के आला अफसरों के समक्ष इन नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए हैं। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को बस्तर संभाग में नक्सली संगठन के अंत की शुरुआत माना जा रहा है, क्योंकि सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कई खूंखार चेहरे और भारी भरकम इनामी कैडर शामिल हैं।
करोड़ों का इनाम और बड़े पदों पर काबिज कैडरों ने डाले हथियार पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन 63 माओवादियों में से 36 नक्सली ऐसे हैं जिन पर सरकार ने कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का सामूहिक इनाम घोषित कर रखा था। सरेंडर करने वालों में 18 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो संगठन के भीतर महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थीं। ये नक्सली दक्षिण बस्तर से लेकर ओडिशा की सीमा तक सक्रिय थे और कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहे थे। इतने बड़े इनामी जत्थे का एक साथ मुख्यधारा में आना यह साबित करता है कि अब नक्सली विचारधारा जंगल के भीतर अपनी पकड़ खो रही है और सुरक्षाबलों का दबाव रंग ला रहा है।

डिवीजनल कमेटी मेंबर सहित 8-8 लाख के सात इनामी शामिल इस सरेंडर की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें संगठन के कई शीर्ष पदों पर बैठे नक्सली शामिल हैं। इनमें 8 लाख रुपये का इनामी डिवीजनल कमेटी सदस्य पाकलू उर्फ रैनू, छात्र संगठन का अध्यक्ष मोहन उर्फ संजय और भैरमगढ़ एरिया कमेटी की सचिव सुमित्रा उर्फ द्रोपती जैसे नाम शामिल हैं। इनके अलावा मिलिट्री कंपनी और अन्य विंग के महत्वपूर्ण सदस्यों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। इन बड़े चेहरों के हटने से नक्सली नेटवर्क पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो गया है। प्रशासन ने इन सभी को 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की है और सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन्हें बेहतर जीवन देने का वादा किया है।