शुरुआती बढ़त के बाद बाजार में मची भारी बिकवाली; बैंकिंग और IT शेयरों ने डुबोई लुटिया, विदेशी निवेशकों की एग्जिट और ‘ट्रम्प टैरिफ’ के डर से बाजार धड़ाम
मुंबई (ए): भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 22 जनवरी को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के दम पर सेंसेक्स ने सुबह 82,783 का शानदार हाई बनाया था, लेकिन दोपहर होते-होते मुनाफावसूली (Profit Booking) का ऐसा दौर चला कि बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। सेंसेक्स अपने दिन के ऊंचे स्तर से करीब 750 अंक नीचे गिर गया, वहीं निफ्टी भी 25,250 के महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे कारोबार कर रहा है।
बाजार गिरने की 3 बड़ी वजहें: FIIs की बिकवाली और ट्रम्प फैक्टर
शेयर बाजार में आई इस अचानक गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। पहला, विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार जारी बिकवाली—सिर्फ 21 जनवरी को ही इन्होंने ₹1,787 करोड़ के शेयर बेच डाले। दूसरा कारण, खराब तिमाही नतीजे—रिलायंस और बड़े बैंकों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे हैं। तीसरा और सबसे बड़ा डर डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियां हैं। ट्रम्प के सख्त रुख से ग्लोबल ट्रेड वॉर की आहट सुनाई दे रही है, जिससे भारत के IT और फार्मा एक्सपोर्ट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में हाहाकार, दिग्गज शेयर टूटे
बिकवाली के इस दबाव में सबसे ज्यादा गाज बैंकिंग और आईटी सेक्टर पर गिरी है। निफ्टी बैंक और निफ्टी IT इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। दिग्गज शेयर जैसे ICICI बैंक, एक्सिस बैंक और L&T में 1 से 2% तक की गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में हल्की खरीदारी ने बाजार को पूरी तरह धराशायी होने से बचा रखा है।
ग्लोबल मार्केट का मिला-जुला असर, एशियाई बाजारों में तेजी
जहाँ भारतीय बाजार दबाव में है, वहीं एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई करीब 1.8% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजारों (डाउ जोन्स और नैस्डेक) में भी बुधवार को 1% से ज्यादा की तेजी रही थी, लेकिन भारतीय बाजार स्थानीय कारकों और बजट से पहले की अनिश्चितता के कारण रिकवर नहीं कर पा रहे हैं।
एक्सपर्ट की चेतावनी: 1 फरवरी बजट तक जारी रहेगा उतार-चढ़ाव
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट तक निवेशकों को ऐसे ही उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। तकनीकी जानकारों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर ‘करो या मरो’ वाला सपोर्ट है। अगर बाजार इसके नीचे गया, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। फिलहाल निवेशकों को केवल लार्ज-कैप शेयरों में ही सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।