जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होने से बुलियन मार्केट में मचा हड़कंप; ₹3.03 लाख पर आई चांदी, 24 कैरेट गोल्ड गिरकर ₹1.51 लाख के स्तर पर पहुँचा
नई दिल्ली(ए): पिछले कई दिनों से रिकॉर्ड ऊंचाई छू रहे गोल्ड और सिल्वर मार्केट में आज यानी 22 जनवरी को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, चांदी की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत या ₹15,000 प्रति किलो की भारी कटौती देखी गई है। वहीं सोने की कीमतों में भी ₹2,728 की कमी आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में आई नरमी और शेयर बाजार में रिकवरी को इस गिरावट की मुख्य वजह माना जा रहा है।
चांदी ने ऑल-टाइम हाई से मारी छलांग, ₹15 हजार की राहत
बीते कल चांदी ने ₹3.20 लाख प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, लेकिन आज सुबह कारोबार शुरू होते ही इसमें जोरदार गिरावट आई। चांदी अब ₹3,03,000 प्रति किलो पर कारोबार कर रही है। जानकारों का कहना है कि ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण कीमतों में यह बड़ा करेक्शन आया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉन्ग टर्म में चांदी अभी भी ₹4 लाख के स्तर को छू सकती है।
सोना भी हुआ सस्ता, जानें आपके शहर का भाव
सोने की कीमतों में आई गिरावट के बाद अब 24 कैरेट शुद्ध सोना ₹1,51,499 प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली और जयपुर में भाव ₹1,54,460 के करीब हैं, जबकि मुंबई और रायपुर में यह ₹1,54,310 के आसपास ट्रेड कर रहा है। 22 कैरेट सोने की बात करें तो इसकी कीमत अब ₹1,38,773 प्रति 10 ग्राम पर आ गई है।
क्यों आई गिरावट? ये हैं 3 प्रमुख कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला, दुनिया भर में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच सुलह की खबरों से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की डिमांड घटी है। दूसरा, शेयर बाजार में आई तेजी ने निवेशकों का ध्यान सोने से हटाकर इक्विटी की ओर खींचा है। तीसरा, अमेरिकी टैरिफ और डॉलर की मजबूती के बीच निवेशकों ने ऊंचे भाव पर जमकर सोना और चांदी बेचे हैं।
भविष्य की राह: क्या ₹1.90 लाख तक जाएगा सोना?
रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के मुताबिक, यह गिरावट अस्थाई हो सकती है। अगर 2026 में मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव फिर से बढ़ता है या अमेरिकी नीतियां सख्त होती हैं, तो सोना ₹1,90,000 और चांदी ₹4,00,000 तक जा सकती है। फिलहाल एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस गिरावट का फायदा उठाकर लंबी अवधि के लिए निवेश करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।