आरबीआई ने तैयार किया नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क, 6 अप्रैल तक मांगे सुझाव
डिजिटल लेन-देन में बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को राहत देने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत डिजिटल फ्रॉड होने और समय पर शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में ग्राहकों को 25 हजार रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है।
नई दिल्ली (ए)। डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। ‘कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस’ नाम से जारी इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को त्वरित राहत प्रदान करना है।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक के साथ डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी होती है और वह समय पर इसकी सूचना बैंक को देता है, तो उसे 25 हजार रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है। आरबीआई ने इस मसौदे पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
ड्राफ्ट के मुताबिक यदि 50 हजार रुपए तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और ग्राहक निर्धारित समय सीमा के भीतर इसकी जानकारी देता है, तो उसे नुकसान की राशि का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25 हजार रुपए (जो भी कम हो) वापस मिल सकते हैं।
आरबीआई का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य बैंकिंग शिकायतों के समाधान में लगने वाले समय को कम करना और छोटे मूल्य के फ्रॉड के मामलों में प्रभावी मुआवजा प्रणाली विकसित करना है। इससे ग्राहकों का डिजिटल भुगतान प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित मुआवजा व्यवस्था लागू होने की तिथि से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद इसके अनुभवों और परिणामों के आधार पर इसकी समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।