ऑटोमैटिक रूट से निवेश संभव, LIC में 20% सीमा बरकरार; बीमा कंपनियों और इंटरमीडियरीज को मिलेगा लाभ
केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को मंजूरी दे दी है। अब विदेशी कंपनियां ऑटोमैटिक रूट के जरिए भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों में पूर्ण हिस्सेदारी ले सकेंगी। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी LIC में विदेशी निवेश की सीमा 20 प्रतिशत ही रखी गई है।
मुंबई (ए)। केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को स्वीकृति दे दी है। शनिवार को जारी अधिसूचना के अनुसार अब विदेशी निवेशक ऑटोमैटिक रूट के माध्यम से भारतीय बीमा कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी हासिल कर सकेंगे।
सरकार के इस फैसले से बीमा क्षेत्र में पूंजी निवेश बढ़ने, प्रतिस्पर्धा तेज होने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के लिए अलग प्रावधान रखा गया है, जहां विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत ही बनी रहेगी।
कंपनियों के लिए तय की गईं शर्तें
सरकारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि बीमा क्षेत्र में आने वाला विदेशी निवेश बीमा अधिनियम 1938 के प्रावधानों के तहत मान्य होगा। निवेश लेने वाली कंपनियों को इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) से आवश्यक लाइसेंस एवं मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, जिन कंपनियों में विदेशी निवेश होगा, उनके बोर्ड में चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक (MD) या मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) में से कम से कम एक अधिकारी भारतीय नागरिक होना जरूरी रहेगा।
LIC के लिए अलग व्यवस्था
सरकार ने एलआईसी के लिए अलग निवेश ढांचा बरकरार रखा है। कंपनी में ऑटोमैटिक रूट से अधिकतम 20 प्रतिशत विदेशी निवेश ही किया जा सकेगा। यह निवेश एलआईसी अधिनियम 1956 और बीमा अधिनियम 1938 के लागू प्रावधानों के अनुरूप होगा।
इंटरमीडियरीज को भी राहत
सरकार ने बीमा क्षेत्र से जुड़ी मध्यस्थ संस्थाओं को भी 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति दी है। इसमें इंश्योरेंस ब्रोकर, री-इंश्योरेंस ब्रोकर, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर, इंश्योरेंस कंसल्टेंट, सर्वेयर, लॉस असेसर, मैनेजिंग जनरल एजेंट और इंश्योरेंस रिपॉजिटरी जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
पहले संसद से मिला था रास्ता
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में संसद ने ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक 2025’ पारित किया था। इसके जरिए बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में जरूरी संशोधन किए गए थे।
सीमावर्ती देशों के निवेश नियम भी आसान
सरकार ने मार्च में भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश नियमों में भी ढील दी थी। संशोधित ‘प्रेस नोट-3’ के तहत अब ऐसे देशों से 10 प्रतिशत तक गैर-नियंत्रण हिस्सेदारी वाले निवेश को पूर्व सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं होगी और यह ऑटोमैटिक रूट से किया जा सकेगा।