याचिकाकर्ता को सक्षम प्राधिकरण के पास जाने की सलाह; कोर्ट ने कहा- सीधे शीर्ष अदालत आने के बजाय पहले संबंधित मंच पर रखें मामला
नई दिल्ली (ए)। पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी देने के लिए डिस्पेंसिंग नोजल पर लेबल लगाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। सोमवार, 31 अगस्त को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष जाने की छूट दी।
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने याचिका में मांग की थी कि देशभर के पेट्रोल पंपों की प्रत्येक डिस्पेंसिंग नोजल पर पेट्रोल में मिलाए गए एथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखा जाए। उनका तर्क था कि उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार है कि वह जिस ईंधन की खरीद कर रहा है, उसमें एथेनॉल की मात्रा कितनी है।
कोर्ट ने पूछा- पहले हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि इस मामले को सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाने के बजाय पहले हाई कोर्ट या संबंधित विभाग के सामने क्यों नहीं रखा गया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए सक्षम अथॉरिटी के पास जाने का रास्ता खुला रखा है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को चुनौती नहीं दे रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि पेट्रोल खरीदने वाले ग्राहक को उसमें एथेनॉल की मात्रा की स्पष्ट जानकारी मिले। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सामान्य पैकेज्ड सामान पर उसकी सामग्री लिखी होती है, तो पेट्रोल के मामले में भी ऐसी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।
केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि एथेनॉल मिश्रण नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही फैसला दे चुका है।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। सरकार इसे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत और घरेलू स्तर पर जैव ईंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रोत्साहित कर रही है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है, जिससे किसानों के लिए भी बाजार तैयार होता है।
पुरानी गाड़ियों को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
E20 ईंधन को लेकर सबसे ज्यादा चिंता पुराने वाहनों के मालिकों में देखी जा रही है। ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन से कुछ पुराने वाहनों में रबर, प्लास्टिक और अन्य ईंधन-प्रणाली वाले हिस्सों पर असर पड़ने तथा माइलेज में बदलाव की आशंका जताई जाती रही है। हालांकि इसका प्रभाव वाहन के मॉडल, निर्माण वर्ष और निर्माता की तकनीकी अनुकूलता पर निर्भर करता है।
ऐसे में पेट्रोल पंप पर ईंधन में एथेनॉल की मात्रा स्पष्ट होने से वाहन मालिक अपने वाहन के लिए उपयुक्त ईंधन को लेकर बेहतर निर्णय ले सकेंगे।