12 बैंकिंग यूनियनों के करीब 7.5 लाख कर्मचारी रहेंगे आंदोलन में शामिल, 5-डे वर्किंग की मांग पर अड़ी यूनियनें
बैंक से जुड़े जरूरी काम निपटाने के लिए रविवार को ग्राहकों को अतिरिक्त मौका मिला है। सामान्य तौर पर रविवार को बैंक बंद रहते हैं, लेकिन इस बार सरकारी बैंक खुले हैं। इसके बाद सोमवार से बुधवार तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कर्मचारी संगठनों ने सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है।
नई दिल्ली (ए)। बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल से पहले रविवार को सरकारी बैंक खुले रहने से ग्राहकों को लंबित काम पूरे करने का अवसर मिला है। सोमवार से बुधवार तक हड़ताल के चलते शाखाओं में नियमित बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है।
बैंक कर्मचारी संगठन लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन साप्ताहिक अवकाश की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि जब तक 5-डे वर्किंग लागू करने की स्पष्ट तारीख तय नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
हड़ताल में सात प्रमुख बैंक कर्मचारी संगठनों के शामिल होने की बात कही गई है। इनमें एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीईएफ और आईएनबीओसी शामिल हैं। यूनियनों के अनुसार, इन संगठनों से जुड़े कर्मचारियों की संख्या बैंकिंग क्षेत्र के करीब 90 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है।
एटीएम से नकदी निकालने पर क्या होगा
हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं की सेवाएं प्रभावित होने के बावजूद एटीएम के सामान्य रूप से काम करने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एटीएम से नकदी निकालने पर निर्धारित मासिक मुफ्त लेनदेन सीमा से अधिक के लिए लगने वाला शुल्क बैंक हड़ताल के कारण अलग से समाप्त नहीं होता। सामान्य नियमों के तहत मुफ्त सीमा पार करने पर शुल्क लागू होता है।
वर्तमान व्यवस्था में अपने बैंक के एटीएम से हर महीने पांच मुफ्त नकद निकासी की सुविधा है। दूसरे बैंक के एटीएम से मेट्रो शहरों में तीन और अन्य शहरों में पांच मुफ्त लेनदेन की सीमा है। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त लेनदेन पर 23 रुपए और जीएसटी शुल्क लिया जाता है।
सरकार और यूनियनों के बीच मतभेद
हड़ताल से पहले वित्तीय सेवा विभाग, इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक प्रबंधन की ओर से यूनियनों से आंदोलन वापस लेने की अपील की गई थी। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों पर कायम रहते हुए हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है।
सरकारी पक्ष से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि बैंकों में पांच दिन काम की व्यवस्था लागू करने का सरकार की ओर से कोई औपचारिक वादा नहीं किया गया था। वहीं कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
पीएलआई को लेकर भी विवाद
5-डे वर्किंग के अलावा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई को लेकर भी कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच मतभेद हैं। नए प्रोत्साहन नियमों के तहत उच्च स्तर के अधिकारियों को प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त इंसेंटिव दिए जाने की व्यवस्था का यूनियनें विरोध कर रही हैं। कुछ मामलों में यह प्रोत्साहन 365 दिनों की बेसिक सैलरी के बराबर तक होने की बात कही गई है।