4 साल बाद ब्याज दर में 0.25% की बढ़ोतरी, 5.25% से बढ़कर 5.50% हुई दर; महंगाई पर काबू पाने के लिए सख्त किया रुख
नई दिल्ली (ए)। रिजर्व बैंक ने महंगाई पर लगाम कसने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। चार साल बाद पहली बार RBI ने रेपो रेट 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दी। मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को फैसले की घोषणा की। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा होगा, जिसका असर आगे चलकर होम, कार और पर्सनल लोन की ब्याज दरों और EMI पर पड़ सकता है।
RBI के इस फैसले से आने वाले समय में कर्ज लेने वालों की लागत बढ़ सकती है। रेपो रेट वह दर है, जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को अल्प अवधि के लिए पैसा देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ती है और इसका असर ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज पर पड़ सकता है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई के जोखिम को देखते हुए ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक परिस्थितियों और खराब मौसम के कारण खाद्य महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ने समय रहते महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अपना रुख सख्त किया है।
महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान 4.7 से बढ़कर 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 से 6.0 प्रतिशत, चौथी तिमाही में 5.5 से 5.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए 5.3 से बढ़ाकर 5.6 प्रतिशत किया गया है।
GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1%
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। दूसरी तिमाही के लिए वृद्धि अनुमान 6.4 से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत और तीसरी तिमाही का अनुमान 6.5 से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत किया गया है। चौथी तिमाही का अनुमान 6.8 प्रतिशत पर बरकरार है, जबकि वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही का अनुमान 7.3 से घटाकर 7.1 प्रतिशत किया गया है।
आम लोगों पर क्या होगा असर
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर नए कर्ज लेने वालों पर पड़ सकता है। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ने से EMI में इजाफा हो सकता है। जिन लोगों का लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा है, उनकी EMI या लोन की अवधि पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि दूसरी ओर बैंक जमा और FD पर ब्याज दरें बढ़ाकर बचतकर्ताओं को राहत दे सकते हैं।
रेपो रेट कब घट सकती है
आगे ब्याज दरों में कटौती का फैसला महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यदि महंगाई लगातार नियंत्रण में रहती है और अर्थव्यवस्था की स्थिति अनुकूल रहती है तो RBI भविष्य की बैठकों में रेपो रेट घटाने पर विचार कर सकता है। केंद्रीय बैंक हर मौद्रिक नीति बैठक में महंगाई, आर्थिक वृद्धि और घरेलू तथा वैश्विक परिस्थितियों की समीक्षा के बाद फैसला करता है।
इस साल अब तक दर स्थिर थी
2026 में अप्रैल, जून और अगस्त में हुई RBI की तीन मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखी गई थी। अब अक्टूबर की बैठक में इसमें 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।