राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत 10 दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बनाया पक्षकार; बाराखंबा से शीर्ष अदालत तक निकाला मार्च
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में विपक्षी दलों ने सोमवार को न्यायिक लड़ाई का रास्ता अपनाया। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाया है। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई।
नई दिल्ली (ए)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को कांग्रेस समेत 10 राजनीतिक दलों के 11 नेताओं ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव सहित विपक्ष के अन्य नेता शामिल हैं। याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका दाखिल करने से पहले विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के बाराखंबा से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। करीब एक किलोमीटर के इस मार्च में नेता पैदल चलने के साथ बसों और अन्य वाहनों से भी पहुंचे। एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष ने इस तरह सड़क से अदालत तक अपनी आवाज पहुंचाने की रणनीति अपनाई।
मार्च से पहले राहुल गांधी ने करीब 40 मिनट तक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने विपक्ष के इस प्रदर्शन की तुलना भगवान शिव की बारात से करते हुए कहा कि इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। उनके इस बयान के जरिए विपक्षी एकजुटता और आंदोलन में सभी के लिए भागीदारी का संदेश देने की कोशिश की गई।

इससे एक दिन पहले, रविवार को विपक्षी सांसदों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। सांसद एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए उन्हें याचिका दाखिल करने का रास्ता सुझाया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
एसआईआर को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।