भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में खड़े-खड़े खाना बन गया है आदत, रिसर्च कहती है—54% बढ़ जाता है मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा
तेजी से बदलती लाइफस्टाइल में बैठे बिना, खड़े-खड़े या चलते-फिरते खाना अब आम हो गया है। चाहे ऑफिस का छोटा-सा लंच ब्रेक हो या घर पर टीवी देखते हुए जल्दबाजी में खाया गया स्नैक—यह आदत धीरे-धीरे हमारे पाचन तंत्र और सम्पूर्ण सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। रिसर्च बताती है कि तेज या खड़े होकर खाने से मेटाबोलिक सिंड्रोम का खतरा 54% तक बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह डायबिटीज, मोटापा, हाई बीपी से लेकर हार्ट डिजीज तक की वजह बन सकता है।
हेल्थ। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास आराम से बैठकर भोजन करने का समय कम होता जा रहा है। ऑफिस में जल्दबाजी में लिया गया लंच हो, सड़क पर चलते-चलते खाया गया स्नैक या घर पर खड़े होकर किया गया नाश्ता—यह ट्रेंड अब आम हो चुका है। शादी-ब्याह और पार्टियों में भी खड़े होकर खाने का चलन बढ़ा है, जिसे लोग सुविधा के साथ फैशन का हिस्सा मानते हैं।
लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि शरीर की यह ‘स्टैंडिंग ईटिंग पोजिशन’ पाचन तंत्र पर सीधा असर डालती है। 2021 में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित मेटा-एनालिसिस के अनुसार, खड़े होकर या तेजी से खाने की आदत मेटाबोलिक सिंड्रोम का जोखिम 54% तक बढ़ा देती है। यह समस्या इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है, जिससे डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।
एक्सपर्ट की राय
लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की सीनियर डाइटीशियन डॉ. पूनम तिवारी बताती हैं कि खड़े होकर खाने से भोजन तेजी से पेट में पहुंचता है, जिससे पाचन एंजाइम्स को उसे सही तरह से तोड़ने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। इसका असर गैस, एसिडिटी, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है।
वे कहती हैं कि इस पोजिशन में व्यक्ति अक्सर जल्दी-जल्दी खाता है, जिसके कारण ओवरईटिंग और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक यह आदत बनी रहे तो आंतों पर दबाव बढ़ सकता है और शरीर आवश्यक पोषक तत्वों का अवशोषण भी कम कर सकता है।
आखिर कौन-सी खाने की पोजिशन शरीर के लिए सबसे बेहतर है, किन 9 नुकसानों से सावधान रहना चाहिए और हेल्दी ईटिंग के 12 नियम क्या हैं—इन सभी बिंदुओं को नीचे दिए गए ग्राफिक में समझाया गया है।