महंगी दवाइयां नहीं, बस इन 5 आदतों से दूर होंगी बीमारियां; विशेषज्ञों ने बताए सेहतमंद रहने के राज।
रायपुर/भिलाई : आज की भागदौड़ भरी ‘स्क्रीन लाइफ’ और असंतुलित खान-पान ने मानव शरीर को समय से पहले बीमारियों का घर बना दिया है। जिस शरीर को हम दुनिया की सबसे उन्नत मशीन कहते हैं, अक्सर उसकी बुनियादी ‘सर्विसिंग’ करना ही भूल जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का दावा है कि लंबी उम्र और असीमित ऊर्जा का रहस्य किसी जादुई दवा में नहीं, बल्कि हमारी रसोई और सुबह की उन छोटी आदतों में छिपा है जिन्हें आधुनिकता ने हमसे छीन लिया है। आइए जानते हैं विज्ञान और आयुर्वेद के मेल से बने वे 5 आधुनिक सूत्र, जो आपकी जीवनशैली को पूरी तरह बदल सकते हैं।
उषापान: शरीर का नेचुरल क्लीनिंग एजेंट
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के भीतर जमा जहरीले तत्वों (Toxins) को बाहर निकालने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका ‘उषापान’ है। जापानी वॉटर थेरेपी और तांबे के पात्र का संगम शरीर में ‘ऑटोफैगी’ की प्रक्रिया को सक्रिय करता है, जिससे शरीर अपनी ही मृत कोशिकाओं को साफ करने लगता है। घूँट-घूँट पानी पीना पाचन तंत्र की अम्लता (Acidity) को संतुलित कर मेटाबॉलिज्म को गति देता है।
सर्केडियन रिदम: जैविक घड़ी का अनुशासन
हमारा लिवर और पाचन तंत्र सूरज की रोशनी के साथ तालमेल बिठाकर काम करते हैं। रात के समय भारी भोजन करना ‘मेटाबॉलिक बोझ’ बढ़ाता है। आधुनिक चिकित्सा अब ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ (16 घंटे का उपवास) की वकालत कर रही है, जो शरीर को रिपेयरिंग का समय देती है और कैंसर जैसे रोगों की संभावना को न्यूनतम करती है। सूर्यास्त के समीप भोजन करना दीर्घायु होने का सबसे पुराना वैज्ञानिक रहस्य है।
डिजिटल डिटॉक्स: ‘ईयरथिंग’ से घटेगा तनाव
आधुनिक दौर में शारीरिक थकान से बड़ी समस्या ‘मेंटल फटीग’ है। गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू-लाइट और सोशल मीडिया का ‘डोपामाइन लूप’ मस्तिष्क को कभी विश्राम नहीं लेने देता। नंगे पैर जमीन पर चलने (Earthing) से शरीर का विद्युत आवेश संतुलित होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर’ कहते हैं। यह प्रक्रिया तनाव हार्मोन कार्टिसोल को तुरंत नियंत्रित कर नींद की गुणवत्ता बढ़ाती है।
‘गट-ब्रेन’ कनेक्शन: दूसरा मस्तिष्क है आपका पेट
विज्ञान अब मानता है कि हमारे खुश रहने का सीधा संबंध पेट के स्वास्थ्य से है। चीनी और मैदा जैसे परिष्कृत खाद्य पदार्थ पेट के लाभदायक बैक्टीरिया को नष्ट कर देते हैं। अपनी डाइट में ‘प्रोबायोटिक्स’ (दही, कांजी) और मोटा अनाज शामिल करना न केवल पाचन सुधारता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता और खुशमिजाजी भी बढ़ाता है। याद रखें, एक अस्वस्थ पेट कभी एक स्वस्थ दिमाग को जन्म नहीं दे सकता।
एक्सरसाइज स्नैकिंग: सिटिंग इज द न्यू स्मोकिंग
दिन भर कुर्सी पर बैठे रहना सिगरेट पीने जितना ही घातक है। यदि आपके पास जिम जाने का समय नहीं है, तो ‘एक्सरसाइज स्नैकिंग’ अपनाएं। हर एक घंटे के अंतराल में 5 मिनट की स्ट्रेचिंग, सीढ़ियां चढ़ना या तेज चलना इंसुलिन की संवेदनशीलता को बनाए रखता है। यह सूक्ष्म व्यायाम तकनीक ऊर्जा के स्तर को गिरने नहीं देती और रीढ़ की हड्डी की बीमारियों से बचाती है।
विशेषज्ञ का निष्कर्ष (The Expert View):
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सेहत कोई ‘डेस्टिनेशन’ नहीं बल्कि एक ‘कंटीन्यूअस जर्नी’ है। शरीर आपका इकलौता वह घर है जिसे आप बदल नहीं सकते, इसलिए इसमें किया गया निवेश ही भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है।