गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन: नक्सल मोर्चे के एक्सपर्ट IPS जितेंद्र शुक्ला बने NSG के ग्रुप कमांडर, राज्य सरकार को तत्काल रिलीव करने का सख्त आदेश
रायपुर (ए)। छत्तीसगढ़ के पुलिस गलियारों से लेकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक इस वक्त सिर्फ एक ही नाम की गूंज है—IPS जितेंद्र शुक्ला! प्रदेश के सबसे चुनौतीपूर्ण नक्सल मोर्चों पर अपनी बहादुरी का लोहा मनवाने वाले 2013 बैच के इस जांबाज अधिकारी को अब केंद्र सरकार ने देश की सबसे विशिष्ट और घातक फोर्स NSG (National Security Guard) में ‘ग्रुप कमांडर’ की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट आदेश जारी करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार से कहा है कि इस अधिकारी को बिना किसी देरी के ‘तत्काल रिलीव’ किया जाए। यह खबर केवल एक तबादला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गौरव का वो क्षण है जब यहां का एक जांबाज अफसर अब तिरंगे की सुरक्षा के लिए ‘ब्लैक कैट’ कमांडोज की अगुवाई करेगा। आखिर क्यों केंद्र सरकार ने जितेंद्र शुक्ला को इस सबसे कठिन मिशन के लिए चुना और क्या है उनकी प्रयागराज से दिल्ली तक के सफर की पूरी दास्तां, देखिए हमारी इस विशेष रिपोर्ट में।
गृह मंत्रालय का फरमान और दिल्ली में बड़ी तैनाती
छत्तीसगढ़ कैडर के 2013 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र शुक्ला को लेकर केंद्र सरकार का फैसला बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, जितेंद्र शुक्ला को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत एसपी स्तर पर नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) में ग्रुप कमांडर के रूप में तैनात किया गया है। यह पद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि NSG सीधे तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियानों और हाईजैकिंग जैसे संकट के समय मोर्चा संभालती है। गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को जो पत्र भेजा है, उसमें ‘तत्काल’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जो इस नियुक्ति की गंभीरता और प्राथमिकता को दर्शाता है। माना जा रहा है कि जितेंद्र शुक्ला को उनकी बेदाग छवि, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व करने के कौशल की वजह से इस विशिष्ट फोर्स का हिस्सा बनाया गया है।
प्रयागराज की धरती से निकला देश का रक्षक
IPS जितेंद्र शुक्ला की इस उपलब्धि के पीछे उनके संघर्ष और शिक्षा की एक लंबी कहानी है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) के रहने वाले जितेंद्र शुक्ला का जन्म 22 सितंबर 1983 को हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई प्रयागराज के ही प्रतिष्ठित राजकीय इंटर कॉलेज से की, जहां से उन्होंने अनुशासन और सेवा का पाठ सीखा। इसके बाद उन्होंने शिक्षा के केंद्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया और फिर भूगोल विषय में एमए की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के दौरान ही उन्होंने देश सेवा का संकल्प लिया और सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर 2 सितंबर 2013 को आईपीएस की वर्दी पहनी। प्रशिक्षण के दौरान ही बिलासपुर जिले के कोटा में बतौर थाना प्रभारी उन्होंने अपने तेवर दिखा दिए थे, जिससे साफ हो गया था कि यह अधिकारी आने वाले समय में पुलिसिंग की नई इबारत लिखेगा।
नक्सल मोर्चे पर पराक्रम और ‘एसपी’ के रूप में धाक
जितेंद्र शुक्ला का अब तक का सर्विस रिकॉर्ड किसी वीरता गाथा से कम नहीं है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील इलाकों में अपनी सेवाएं दी हैं। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अंबिकापुर में सीएसपी और नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में काम किया, जहां उन्होंने नक्सलियों के सूचना तंत्र को ध्वस्त करने में बड़ी सफलता हासिल की थी। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें महासमुंद, कोरबा, राजनांदगांव और दुर्ग जैसे महत्वपूर्ण जिलों का पुलिस कप्तान (SP) बनाया गया। इन जिलों में काम करते हुए उन्होंने न केवल अपराध पर नियंत्रण पाया, बल्कि पुलिस की कार्यशैली को भी आधुनिक बनाया। उनके इसी व्यापक अनुभव, विशेष रूप से नक्सल विरोधी अभियानों में उनकी रणनीतिक सूझबूझ को देखते हुए अब उन्हें देश की सबसे प्रतिष्ठित आतंकवाद-रोधी इकाई NSG में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।