सियासी पारा हाई: रायगढ़ कलेक्टर और एसपी को हटाने की मांग, तमनार हिंसा की न्यायिक जांच के लिए कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत
रायपुर (ए) । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का तमनार क्षेत्र इस वक्त सुलगती हुई सियासत का केंद्र बन गया है। कोयला खदान को लेकर शुरू हुआ ग्रामीणों का आंदोलन अब एक हिंसक संघर्ष और बड़े राजनीतिक युद्ध में तब्दील हो चुका है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज रविवार को अपनी जांच समिति के साथ तमनार के लिए कूच कर चुके हैं, जिससे साफ हो गया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी। बैज ने सीधे तौर पर प्रशासन को इस हिंसा का दोषी ठहराते हुए रायगढ़ कलेक्टर और एसपी पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ‘फर्जी जनसुनवाई’ और ‘पुलिसिया दमन’ के आरोपों के बीच तमनार की धरती अब न्याय की मांग कर रही है। आखिर क्यों एक शांतिपूर्ण आंदोलन अचानक आगजनी और खून-खराबे में बदल गया? देखिए इस पूरे घटनाक्रम की सबसे विस्तृत रिपोर्ट।
प्रशासन पर सीधा हमला: ‘उद्योगपतियों के इशारे पर हुआ दमन’
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तमनार रवाना होने से पहले रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखे प्रहार किए। बैज ने आरोप लगाया कि तमनार में जो कुछ भी हुआ, वह आदिवासियों के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पिछले 18 दिनों से अपनी जमीन और हक के लिए धरने पर बैठे थे, लेकिन प्रशासन ने उनसे संवाद करने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता चुना। बैज ने आरोप लगाया कि रायगढ़ के कलेक्टर और एसपी पूरी तरह से उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रहे हैं और इसी दबाव के चलते ग्रामीणों को डराने, धमकाने और जबरन थानों में ले जाने जैसी अलोकतांत्रिक हरकतें की गईं। कांग्रेस का साफ कहना है कि जब तक इस पूरे कांड की न्यायिक जांच नहीं होती और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
क्यों सुलग रहा है तमनार? कोयला खदान और फर्जी जनसुनवाई का सच
तमनार क्षेत्र में JPL (जिंदल पावर लिमिटेड) कोयला खदान को लेकर विवाद की जड़ें काफी गहरी हैं। क्षेत्र के 14 गांवों के ग्रामीण पिछले 18 दिनों से लिबरा रोड पर डेरा डाले हुए हैं, जहां उन्होंने सड़क पर पेड़ काटकर रास्ता जाम कर दिया है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि खदान के लिए जो जनसुनवाई आयोजित की गई थी, वह पूरी तरह फर्जी थी और उसमें ग्रामीणों की सहमति नहीं ली गई थी। आंदोलनकारियों की मांग है कि जब तक धौराभाठा बाजार में हुई उस कथित जनसुनवाई को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, घरघोड़ा SDM दुर्गा प्रसाद का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बातचीत चल रही है और निरस्तीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का भरोसा प्रशासन से पूरी तरह उठ चुका है, जिससे हालात बेकाबू हो गए हैं।
पुलिस और ग्रामीणों के बीच खूनी झड़प: थाना प्रभारी हुई घायल
शनिवार का दिन तमनार के लिए काला दिन साबित हुआ, जब धरना स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और ग्रामीणों के बीच आमना-सामना हो गया। यह झड़प इतनी हिंसक थी कि महिलाओं ने अपना आपा खो दिया और तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम पर हमला कर दिया, जिससे वे घायल होकर मौके पर ही बेहोश हो गईं। इस संघर्ष में SDOP अनिल विश्वकर्मा सहित कई अन्य पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं। तनाव इतना बढ़ गया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के वाहनों और मौके पर मौजूद एम्बुलेंस को आग के हवाले कर दिया। गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों को रायगढ़ रेफर किया गया है। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और दहशत का माहौल बना हुआ है, वहीं कांग्रेस की जांच समिति अब मौके पर पहुँचकर इस पूरे बवाल की कड़ियाँ जोड़ने की कोशिश कर रही है।