स्थानीय लोगों और संगठनों का विरोध, पर्यटन विभाग पर लगाया व्यवसायीकरण का आरोप
रायपुर। रायपुर के ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब में पर्यटन विभाग द्वारा बनाई जा रही चौपाटी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध करते हुए तालाब के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखने की मांग की है। इसी क्रम में रायपुर की मेयर मीनल चौबे ने मंगलवार सुबह बूढ़ा तालाब का निरीक्षण किया और पर्यटन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों पर कड़ी आपत्ति जताई।

निरीक्षण के दौरान मेयर मीनल चौबे ने स्पष्ट कहा कि बूढ़ा तालाब रायपुर की ऐतिहासिक धरोहर है, इससे किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पर्यटन विभाग पर तालाब परिसर को पूरी तरह से व्यवसायिक केंद्र बनाने का आरोप लगाया और चौपाटी में शराब परोसने की अनुमति मांगे जाने पर नाराजगी जताई। मेयर के साथ नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप, MIC सदस्य मनोज वर्मा, वार्ड पार्षद मुरली शर्मा और अन्य निगम अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने तालाब के सौंदर्यीकरण के बाद यहां हो रही लापरवाहियों पर भी सवाल उठाए।
छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
बूढ़ा तालाब के पास ही दानी गर्ल्स स्कूल और डिग्री गर्ल्स कॉलेज स्थित हैं। चौपाटी के संचालन से छात्राओं की सुरक्षा और शिक्षा के माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मेयर ने इसे गंभीर विषय बताते हुए कहा कि नगर निगम इस मामले को गंभीरता से लेगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा।

पर्यटन विभाग पर लापरवाही के आरोप
निरीक्षण के दौरान मेयर ने पाया कि सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद तालाब परिसर की उचित देखभाल नहीं हो रही है।
- लाइटें खराब पड़ी हैं।
- म्यूजिकल फाउंटेन बंद पड़ा है।
- तालाब की सफाई अधूरी है।
पर्यटन विभाग को सौंपे गए इस स्थल की बदहाली पर मेयर ने नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों और संगठनों का बढ़ता विरोध
तालाब परिसर में चौपाटी निर्माण का विरोध लगातार तेज हो रहा है। स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों और छात्राओं ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है।
कांग्रेस पार्षद दल ने पूर्व महापौर एजाज ढेबर और सभापति प्रमोद दुबे के नेतृत्व में चौपाटी का विरोध किया था। बूढ़ा तालाब के सौंदर्यीकरण और चौपाटी निर्माण को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। पहले यहां नीलाभ उद्यान में चौपाटी शुरू करने की योजना थी, लेकिन पानी भरने और अतिक्रमण की शिकायतों के कारण ठेका रद्द कर दिया गया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तालाब को संवारकर पर्यटन विभाग को सौंपा गया था, लेकिन अब इसके व्यवसायीकरण को लेकर लगातार विरोध हो रहा है।
मेयर ने कहा कि नगर निगम की ओर से इस मामले पर कड़ा निर्णय लिया जाएगा। स्थानीय लोगों की भावनाओं के खिलाफ जाकर पर्यटन विभाग कोई भी कार्य नहीं कर सकता। आगामी दिनों में इस मामले पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि पर्यटन विभाग चौपाटी पर आगे क्या फैसला लेता है और क्या स्थानीय लोगों का विरोध इसे रोक पाएगा?