गलत फॉर्म, mismatched डाटा और अधूरी जानकारी से रिफंड अटक सकता है; सही दस्तावेज़ और सभी इनकम सोर्स दिखाना जरूरी
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है इसे सही तरीके से भरना। एक छोटी सी गलती न सिर्फ रिफंड में देरी करा सकती है, बल्कि आयकर विभाग की ओर से नोटिस और भारी जुर्माने की वजह भी बन सकती है। इस बार फाइलिंग की आखिरी तारीख 15 सितंबर कर दी गई है, ऐसे में ये 10 बातें ज़रूर ध्यान रखें ताकि ITR प्रक्रिया हो सरल और सुरक्षित।
नई दिल्ली (ए)। आयकर रिटर्न भरते समय अक्सर लोग कुछ सामान्य लेकिन गंभीर गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस मिल सकता है, रिफंड फंस सकता है या संशोधित रिटर्न भरने की नौबत आ सकती है।
इसलिए ITR फाइल करते समय इन 10 बातों का विशेष ध्यान रखें:
1. सही ITR फॉर्म चुनें:
हर करदाता के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म होते हैं। सैलरी, बैंक ब्याज, पेंशन या किराए की आमदनी है तो ITR-1 चुनें। यदि आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो डिविडेंड और कैपिटल गेन को भी शामिल करना जरूरी है। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न अमान्य हो सकता है।
2. बड़े खर्च का स्रोत स्पष्ट होना चाहिए:
यदि आपने क्रेडिट कार्ड पर 10 लाख रुपये खर्च किए हैं या महंगी गाड़ी खरीदी है, तो आपकी घोषित आय के साथ इन खर्चों का संतुलन होना चाहिए, नहीं तो आयकर विभाग संदेह कर सकता है।
3. फॉर्म 26AS, फॉर्म 16 और AIS/TIS की जानकारी मेल खानी चाहिए:
ITR फाइल करने से पहले इन दस्तावेज़ों को आपस में मिलाएं। यदि कोई अंतर हो, तो कारण पता करें और नियोक्ता से ठीक कराएं। गलत जानकारी देने पर रिफंड कम मिल सकता है।
4. व्यक्तिगत विवरण में कोई त्रुटि न हो:
नाम, पता, ईमेल, मोबाइल, पैन, जन्मतिथि — सब कुछ बिल्कुल सटीक होना चाहिए। अगर रिफंड क्लेम कर रहे हैं तो बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड सही भरें।
5. आय के सभी स्रोतों की जानकारी दें:
यदि आपने कोई अतिरिक्त आय जैसे किराए, ब्याज, निवेश या फ्रीलांस से कमाई की है, तो उसे घोषित करना जरूरी है। छिपाने पर 50% से 200% तक जुर्माना लग सकता है।
6. टैक्स-फ्री आय भी ITR में दिखाएं:
कृषि आय, पार्टनरशिप फर्म से शेयर या अन्य टैक्स छूट योग्य आय भी ITR में निर्धारित कॉलम में दिखानी चाहिए। इससे आपकी वित्तीय स्थिति स्पष्ट होती है।
7. साल में जॉब बदली है तो फॉर्म 16 ठीक से मिलाएं:
यदि आपने नौकरी बदली है, तो दोनों नियोक्ताओं से मिले फॉर्म 16 का समुचित मिलान करें। अन्यथा, डुप्लीकेट स्टैंडर्ड डिडक्शन का दावा हो सकता है, जिससे ज्यादा टैक्स देना पड़े।
8. एचआरए का दावा करते समय सटीक दस्तावेज़ दें:
यदि आप किराये के घर में रहते हैं और HRA का दावा कर रहे हैं, तो रेंट एग्रीमेंट, रसीदें और 1 लाख रुपये से अधिक किराए पर मकान मालिक का PAN अनिवार्य है।