थकान, मूड स्विंग और नींद की समस्या हो सकते हैं संकेत • समय रहते जांच और सही लाइफस्टाइल से मिल सकता है समाधान
आमतौर पर हार्मोनल बदलाव की चर्चा महिलाओं से जोड़कर की जाती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों में भी हार्मोनल असंतुलन एक आम समस्या बनती जा रही है। गलत जीवनशैली, बढ़ता तनाव और उम्र के साथ शरीर में हार्मोन के स्तर में बदलाव होने लगता है, जिसका असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ता है।
नई दिल्ली (ए)। शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करने में हार्मोन की अहम भूमिका होती है। यदि शरीर में इनका संतुलन बिगड़ जाए तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी हार्मोनल असंतुलन का शिकार हो सकते हैं।
दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. साकेत कांत के अनुसार हार्मोनल इंबैलेंस ऐसी स्थिति है, जब शरीर में हार्मोन का स्तर सामान्य से कम या ज्यादा हो जाता है। इसका सीधा असर मेटाबॉलिज्म, मूड, नींद, ऊर्जा स्तर और प्रजनन क्षमता पर पड़ता है।
पुरुषों में क्यों होता है हार्मोनल असंतुलन
डॉक्टरों के अनुसार पुरुषों में मुख्य हार्मोन टेस्टोस्टेरोन होता है, जो मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के स्वास्थ्य, सेक्स ड्राइव और स्पर्म प्रोडक्शन के लिए जरूरी होता है। बढ़ती उम्र, तनाव, मोटापा, खराब खानपान और कुछ बीमारियों के कारण इसका स्तर कम हो सकता है।
इसके अलावा शरीर में इंसुलिन, थायरॉइड, कोर्टिसोल और ग्रोथ हार्मोन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन हार्मोन के असंतुलित होने से शरीर के कई कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
नजरअंदाज न करें ये संकेत
विशेषज्ञों के मुताबिक पुरुषों में हार्मोनल असंतुलन होने पर कुछ सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें लगातार थकान रहना, मूड स्विंग, वजन में अचानक बदलाव, मांसपेशियों में कमजोरी, नींद की कमी और यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
कई बार लोग इन संकेतों को सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय रहते जांच और इलाज न कराया जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है।
जांच और संतुलित जीवनशैली जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि यदि ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो मेडिकल जांच कराना जरूरी होता है। इसके लिए हार्मोन प्रोफाइल, थायरॉइड टेस्ट और ब्लड शुगर जैसी जांचें कराई जाती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी बनाकर हार्मोनल संतुलन को काफी हद तक बनाए रखा जा सकता है। समय पर जांच और सही उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।